*ऐसे करें श्रीमद्भागवत कथा -*
एक मुख्य कथाव्यास और दूसरे उनके सहायक विद्वान् ।
कथा में श्रोताओं के कथाव्यास के साथ प्रश्नोत्तर होने चाहिये , श्रोता लोग प्रश्न करें और दोनों विद्वान् आपस में मिलकर उनका समाधान करें ।
संशय 👈 , पूर्वपक्ष👈, उत्तरपक्ष 👈, सिद्धान्तपक्ष 👈
इस शैली में श्रीमद्भागवत की कथा वक्ता और श्रोताओं के मध्य कथामण्डप में चरितार्थ होनी चाहिये ।
प्रधान श्रोता भी सनातनधर्मपरायण आस्तिक और ज्ञाननिधि होने चाहिये , तभी तो वे उत्कृष्ट कोटि के शास्त्रीय प्रश्न रख सकेंगे !
फूहड़ नाच गाने करने के स्थान पर वेद वेदाङ्गादि के शास्त्रीय रहस्यों पर गहन विचार कथा में होना चाहिये ।
अनेक धर्मों की खिचड़ी बनाने वाले, गंगा गये तो गंगादास , जमुना गये तो जमुनादास ऐसे छद्म उदारवादी जैसे मूर्ख और पाखण्डी कथाकारों से दूर रहना चाहिये ।
*।। जय श्री राम ।।*
Pandit Tarun Dubey

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