मंगलवार, 12 जनवरी 2021

*ऐसे करें श्रीमद्भागवत कथा -*

*ऐसे करें श्रीमद्भागवत कथा -*



श्रीमद्भागवत की कथा  केवल  एक कथाकार  को व्यासपीठ पर बिठाकर   नहीं अपितु एक साथ दो  विद्वान् कथाविदों से  समझनी  चाहिये ।

एक मुख्य कथाव्यास और दूसरे उनके सहायक  विद्वान् ।

कथा  में  श्रोताओं के  कथाव्यास के साथ   प्रश्नोत्तर होने चाहिये ,  श्रोता लोग प्रश्न करें और दोनों विद्वान्  आपस में मिलकर उनका  समाधान करें ।

 संशय 👈 , पूर्वपक्ष👈, उत्तरपक्ष 👈, सिद्धान्तपक्ष 👈

इस शैली में श्रीमद्भागवत की कथा  वक्ता और श्रोताओं  के मध्य   कथामण्डप में चरितार्थ होनी चाहिये ।

प्रधान श्रोता भी  सनातनधर्मपरायण आस्तिक और ज्ञाननिधि होने चाहिये , तभी तो वे उत्कृष्ट कोटि के  शास्त्रीय  प्रश्न   रख सकेंगे !

फूहड़ नाच गाने करने  के स्थान पर  वेद वेदाङ्गादि के शास्त्रीय  रहस्यों पर गहन विचार कथा में  होना चाहिये ।

अनेक धर्मों की खिचड़ी बनाने वाले,  गंगा गये तो गंगादास , जमुना गये तो जमुनादास ऐसे     छद्म उदारवादी जैसे  मूर्ख और पाखण्डी  कथाकारों से दूर रहना चाहिये ।

                                                          *।। जय श्री राम ।।*


                                                                                      Pandit Tarun Dubey

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