भगवानभगवान को भेंट 🌹
पुरानी बात है, एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था ।
सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था l
सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था l
जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था।
वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था l वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि कालाभ लेता रहता था ।. एक दिन उस ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टीमांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुएकहा भाई मैं तो हूं संसारी आदमीहमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारणकभी तीर्थ गमन का लाभनहीं ले पाता ।
तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु केचरणों में समर्पित कर देना । भक्त सेठ से सौ रुपए लेकरश्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया.. .
कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वहश्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा ।मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखाकि बहुत सारे संत , भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नामसंकीर्तन बड़ी मस्ती में कररहे हैं ।
🔹 सभी की आंखों से अश्रु धारा बहरही है । जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोलगूंज रहा है । संकीर्तन में बहुत आनंद आरहा था । भक्त भी वहीं रुक करहरिनाम संकीर्तन का आनंद लेने लगा ।.
🔸 फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजनइतनी देर से संकीर्तन करने के कारणउनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखेभी प्रतीत हो रहे हैं उसने सोचाक्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ।.
🔹 उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजनकी व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने मेंउसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े ।
.🔸 उसके पास दो रुपए बच गए उसने सोचा चलो अच्छा हुआ दोरुपए जगन्नाथ जी के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा lजब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा पैसे चढ़ा दिए । सेठयह तौ नहीं कहेगा 100 रुपए चढ़ाए । सेठपूछेगा पैसे चढ़ा दिए मैं बोल दूंगा कि , पैसे चढ़ा दिए ।झूठ भी नहीं होगा और कामभी हो जाएगा ।.
🔹 भक्त ने श्री जगन्नाथ जी केदर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया श्री जगन्नाथजी की छवि को निहारते हुए अपने हृदय में उनको विराजमान कराया ।अंत में उसने सेठ के दोरुपए श्री जगन्नाथ जी के चरणो में चढ़ा दिए ।और बोला यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं ।
.🔸 उसी रात सेठ के पास स्वप्न में श्रीजगन्नाथ जी आए आशीर्वाद दिया और बोलेसेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं यह कहकरश्री जगन्नाथ जी अंतर्ध्यान हो गए ।
.🔹 सेठ जाग गया सोचने लगा मेरा नौकर तौ बड़ा ईमानदार है ,पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी उसने दो रुपए भगवान को कम चढ़ाए? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ? उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ? ऐसा विचार सेठ करता रहा ।.
🔸 काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापसआया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसेजगन्नाथ जी को चढ़ा दिए थै ? भक्त बोला हां मैंनेपैसे चढ़ा दिए ।.
🔹 सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए दो रुपए किस काममें प्रयोग किए । तब भक्त ने सारी बात बताईकी उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था । औरठाकुर जी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे ।.
🔸 सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथाभक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला आप धन्य होआपकी वजह से मुझे श्री जगन्नाथजी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे होगए l
सन्तमत विचार-भगवान को आपके धन की कोईआवश्यकता नहीं है । भगवान को वह 98रुपए स्वीकार है जो जीव मात्रकी सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोईमहत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए l
वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था l वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि कालाभ लेता रहता था ।. एक दिन उस ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टीमांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुएकहा भाई मैं तो हूं संसारी आदमीहमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारणकभी तीर्थ गमन का लाभनहीं ले पाता ।
तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु केचरणों में समर्पित कर देना । भक्त सेठ से सौ रुपए लेकरश्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया.. .
कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वहश्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा ।मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखाकि बहुत सारे संत , भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नामसंकीर्तन बड़ी मस्ती में कररहे हैं ।
🔹 सभी की आंखों से अश्रु धारा बहरही है । जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोलगूंज रहा है । संकीर्तन में बहुत आनंद आरहा था । भक्त भी वहीं रुक करहरिनाम संकीर्तन का आनंद लेने लगा ।.
🔸 फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजनइतनी देर से संकीर्तन करने के कारणउनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखेभी प्रतीत हो रहे हैं उसने सोचाक्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ।.
🔹 उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजनकी व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने मेंउसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े ।
.🔸 उसके पास दो रुपए बच गए उसने सोचा चलो अच्छा हुआ दोरुपए जगन्नाथ जी के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा lजब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा पैसे चढ़ा दिए । सेठयह तौ नहीं कहेगा 100 रुपए चढ़ाए । सेठपूछेगा पैसे चढ़ा दिए मैं बोल दूंगा कि , पैसे चढ़ा दिए ।झूठ भी नहीं होगा और कामभी हो जाएगा ।.
🔹 भक्त ने श्री जगन्नाथ जी केदर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया श्री जगन्नाथजी की छवि को निहारते हुए अपने हृदय में उनको विराजमान कराया ।अंत में उसने सेठ के दोरुपए श्री जगन्नाथ जी के चरणो में चढ़ा दिए ।और बोला यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं ।
.🔸 उसी रात सेठ के पास स्वप्न में श्रीजगन्नाथ जी आए आशीर्वाद दिया और बोलेसेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं यह कहकरश्री जगन्नाथ जी अंतर्ध्यान हो गए ।
.🔹 सेठ जाग गया सोचने लगा मेरा नौकर तौ बड़ा ईमानदार है ,पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी उसने दो रुपए भगवान को कम चढ़ाए? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ? उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ? ऐसा विचार सेठ करता रहा ।.
🔸 काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापसआया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसेजगन्नाथ जी को चढ़ा दिए थै ? भक्त बोला हां मैंनेपैसे चढ़ा दिए ।.
🔹 सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए दो रुपए किस काममें प्रयोग किए । तब भक्त ने सारी बात बताईकी उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था । औरठाकुर जी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे ।.
🔸 सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथाभक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला आप धन्य होआपकी वजह से मुझे श्री जगन्नाथजी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे होगए l
सन्तमत विचार-भगवान को आपके धन की कोईआवश्यकता नहीं है । भगवान को वह 98रुपए स्वीकार है जो जीव मात्रकी सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोईमहत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए l