सोमवार, 22 अप्रैल 2019

भगवान को भेंट

भगवानभगवान को भेंट  🌹


पुरानी बात है, एक सेठ के पास एक व्यक्ति काम करता था ।
 सेठ उस व्यक्ति पर बहुत विश्वास करता था l 
जो भी जरुरी काम हो सेठ हमेशा उसी व्यक्ति से कहता था।
वो व्यक्ति भगवान का बहुत बड़ा भक्त था l वह सदा भगवान के चिंतन भजन कीर्तन स्मरण सत्संग आदि कालाभ लेता रहता था ।. एक दिन उस ने सेठ से श्री जगन्नाथ धाम यात्रा करने के लिए कुछ दिन की छुट्टीमांगी सेठ ने उसे छुट्टी देते हुएकहा भाई मैं तो हूं संसारी आदमीहमेशा व्यापार के काम में व्यस्त रहता हूं जिसके कारणकभी तीर्थ गमन का लाभनहीं ले पाता ।
तुम जा ही रहे हो तो यह लो 100रुपए मेरी ओर से श्री जगन्नाथ प्रभु केचरणों में समर्पित कर देना । भक्त सेठ से सौ रुपए लेकरश्री जगन्नाथ धाम यात्रा पर निकल गया.. .
 कई दिन की पैदल यात्रा करने के बाद वहश्री जगन्नाथ पुरी पहुंचा ।मंदिर की ओर प्रस्थान करते समय उसने रास्ते में देखाकि बहुत सारे संत , भक्त जन, वैष्णव जन, हरि नामसंकीर्तन बड़ी मस्ती में कररहे हैं ।
🔹 सभी की आंखों से अश्रु धारा बहरही है । जोर-जोर से हरि बोल, हरि बोलगूंज रहा है । संकीर्तन में बहुत आनंद आरहा था । भक्त भी वहीं रुक करहरिनाम संकीर्तन का आनंद लेने लगा ।.
🔸 फिर उसने देखा कि संकीर्तन करने वाले भक्तजनइतनी देर से संकीर्तन करने के कारणउनके होंठ सूखे हुए हैं वह दिखने में कुछ भूखेभी प्रतीत हो रहे हैं उसने सोचाक्यों ना सेठ के सौ रुपए से इन भक्तों को भोजन करा दूँ।.
🔹 उसने उन सभी को उन सौ रुपए में से भोजनकी व्यवस्था कर दी। सबको भोजन कराने मेंउसे कुल 98 रुपए खर्च करने पड़े ।
.🔸 उसके पास दो रुपए बच गए उसने सोचा चलो अच्छा हुआ दोरुपए जगन्नाथ जी के चरणों में सेठ के नाम से चढ़ा दूंगा lजब सेठ पूछेगा तो मैं कहूंगा पैसे चढ़ा दिए । सेठयह तौ नहीं कहेगा 100 रुपए चढ़ाए । सेठपूछेगा पैसे चढ़ा दिए मैं बोल दूंगा कि , पैसे चढ़ा दिए ।झूठ भी नहीं होगा और कामभी हो जाएगा ।.
🔹 भक्त ने श्री जगन्नाथ जी केदर्शनों के लिए मंदिर में प्रवेश किया श्री जगन्नाथजी की छवि को निहारते हुए अपने हृदय में उनको विराजमान कराया ।अंत में उसने सेठ के दोरुपए श्री जगन्नाथ जी के चरणो में चढ़ा दिए ।और बोला यह दो रुपए सेठ ने भेजे हैं ।
.🔸 उसी रात सेठ के पास स्वप्न में श्रीजगन्नाथ जी आए आशीर्वाद दिया और बोलेसेठ तुम्हारे 98 रुपए मुझे मिल गए हैं यह कहकरश्री जगन्नाथ जी अंतर्ध्यान हो गए ।
.🔹 सेठ जाग गया सोचने लगा मेरा नौकर तौ बड़ा ईमानदार है ,पर अचानक उसे क्या जरुरत पड़ गई थी उसने दो रुपए भगवान को कम चढ़ाए? उसने दो रुपए का क्या खा लिया ? उसे ऐसी क्या जरूरत पड़ी ? ऐसा विचार सेठ करता रहा ।.
🔸 काफी दिन बीतने के बाद भक्त वापसआया और सेठ के पास पहुंचा। सेठ ने कहा कि मेरे पैसेजगन्नाथ जी को चढ़ा दिए थै ? भक्त बोला हां मैंनेपैसे चढ़ा दिए ।.
🔹 सेठ ने कहा पर तुमने 98 रुपए क्यों चढ़ाए दो रुपए किस काममें प्रयोग किए । तब भक्त ने सारी बात बताईकी उसने 98 रुपए से संतो को भोजन करा दिया था । औरठाकुर जी को सिर्फ दो रुपए चढ़ाये थे ।.
🔸 सेठ सारी बात समझ गया व बड़ा खुश हुआ तथाभक्त के चरणों में गिर पड़ा और बोला आप धन्य होआपकी वजह से मुझे श्री जगन्नाथजी के दर्शन यहीं बैठे-बैठे होगए l
सन्तमत विचार-भगवान को आपके धन की कोईआवश्यकता नहीं है । भगवान को वह 98रुपए स्वीकार है जो जीव मात्रकी सेवा में खर्च किए गए और उस दो रुपए का कोईमहत्व नहीं जो उनके चरणों में नगद चढ़ाए गए l 

पूजन जानकारी

पूजन जानकारी 

जय श्री राम

 सभी महानुभावो को मैं पूजन  के बारे में सबसे पहले यही बताना चाहूंगा कि अपने बच्चों में अगर आपको अच्छे संस्कार डालना है | तो आप के घर के समीप जो मंदिर है वहां पर अपने बच्चों को 24 घंटे में एक बार जरूर भेजें जिससे आपके बच्चों मे सकारात्मक विचार आएंगे और बच्चों का मन भगवान की तरफ लगने लगेगा | और अगर वह आरती के समय सुबह शाम मंदिर पहुंचे तो अति उत्तम रहेगा 

ज्योतिष मे सटीक फलादेश

ज्योतिष मे सटीक फलादेश 


🌿ज्योतिष में सटीक फलादेश 🌿


ज्योतिष में मुख्य रूप से नवग्रह 27 नक्षत्र और कुंडली के 12 भाव के आधार पर ही लोग फलादेश करते हैं।

इन्ही क़ो पढ़ने समझने वाले क़ो ज्योतिषि कहते है।
         तौ कुंडली फलित मे इतना विरोधाभास क्यॊ जितने ज्योतिषी उतनी तरह की बाते क्यो कोई  कुछ बोलता है कोई कुछ जब ज्योतिष गणित है तो सबका एक क्यो नही । कारण हम बताते है जितने ज्योतिष क़ो जानने वाले है उनकी सबकी एक फलित होगा और जो ज्योतिष क़ो जानता नही केवल मनगढ़ंत बताएगा तो अंतर आएगा । कोई समस्या है तौ समाधान भी है ये बहुत बड़ी समस्या है इसका भी कोई  तौ हल होगा की अंतर क्यॊ हॊता है।
 ज्योतिषियों का ध्यान कारक पर प्रथम रहता है ।

गौर कीजिए 🌿

माने चौथे भाव का कारक चंद्र है बुरी तरह पीड़ित है राहु या केतु से सम्बन्ध है औऱ चौथे भाव का स्वामी उच्च का है या स्वराशि है औऱ मार्गी है शुभ ग्रह से द्रष्टि है तौ कारक क़ो देखकर कुण्डली फलित देखकर की चंद्र पीड़ित है औऱ केवल कारक से ही फलित निकाला की वाहन सुख नही मिलेगा प्रापर्टी नही बना पाएगा सुख नही मिलेगा तो सब गलत ही होगा क्योकि चौथा भाव का स्वामी कुण्डली मे अच्छी स्तिथि मे है तो पैतृक सम्पत्ति तो ख़ूब होगी ही औऱ बो उस सम्पत्ति क़ो औऱ बढ़ाएगा इसलिए कारक ग्रह से केवल फलित करने से  अंतर आता है औऱ भी एक कारण है की कुछ लोग केवल नक्षत्र क़ो ही देखकर फलित करते है बो सर्वथा ही गलत बो केवल स्वभाव औऱ गुण पर ही सटीक है बाकी सब गलत है इसलिए  पूरी तरह कुण्डली कें 12 भावों क़ो देखौ फिर भावों कें स्वामी  क़ो देखो फिर ग्रहों की द्रष्टि देखो फिर ग्रहों कें स्वभाव क़ो देखो क्योकि स्वभाव अगर नही देखा तो भी फलित नही कर पाओगे आप कहो कुछ होगा स्वभाव कें अनुसार कोयी भी ग्रह कें मित्र औऱ शत्रु देखो स्त्रूप ग्रह से अपेक्षा मत कीजिए जैसा कुण्डली मे है उसका वैसा फल देगा मित्र जगह 50% स्वराशि मे 75% उच्च होने पर 100% अब क्रूर द्रष्टि होने पर क्षमता कम हो जाती है अगर इस तरह कुण्डली फलित करोगे मित्रो तो आपका फलित 90% सटीक निकलेगा सभी अपनी अपनी कुण्डली चेक करे तो जैसे हमने बताया तो आपको अपने अनसुलझे सवाल खुद मिल जाएंगे।

अनुभव मैरा 🌿🌿
               यह मैंने अपने अनुभव के आधार पर एक छोटी सी बात रखी है  परंतु सटीक फलादेश एक बहुत ही बड़ी चीज है.. जो पूजन पाठ दया धर्म दान और कुलदेवता गुरु और इस्ट की कृपा से ही आती है.. 
पंडित तरूण दुवे विदिशा

शब्दों का फेर ••••••

शब्दों का फेर 
 
जो है वो ब्रह्म है,अधिकांश शब्दों का उत्तर उन्ही में छुपा होता है,यदि उनको उल्टा पुल्टा कर लो और जीवन मे उतार लो तो कभी दुखो को प्राप्त नही करोगे।
जैसे एक आम इंसान को दिशा कब मिलती है तो दिशा का उल्टा कर दो शादी, शादी के बाद ही दिशा मिलती है नही तो वो यू ही इधर उधर भटकता रहता है।
एक शब्द है किसी को कुछ देना तो उल्टा कर दो ना दे।किसे से कुछ लेना तो ना ले।भ्रष्ट्राचार यही समाप्त हो जाएगा।
रम पियोगे तो जल्दी से मर जाओगे।
यम के पास जाना हो तो मय के पास जाओ,यम के पास पहुचा देगा।
एक शब्द है लोन वो खुद ही कह रहा है नलो और लोग लाइन लगा के लोन ले रहे है और दुखों को प्राप्त हो रहे है।
एक शब्द है मेडिकल इस को उल्टा कर दो लकड़ी में अर्थात आपको यदि लकड़ी में जल्दी से जाना हो तो मेडिकल में जाओ।
दवा हमेशा वाद का कारण रही है है।
रमा के चक्कर मे पड़ोगे तो मार खाओगे।आसाराम,रामरहीम अंदर है,
दातिमहराज का नंबर है।
लेडी क्या करती है तो डिले कर देती है।
युवा कहा रहता है तो वायु में।
जो आदमी आपको टोपी पहनाये उसे पीटो।योगी जी आगे से ध्यान रखना।
रोड पे चलो तो डरो।
यदि आपको टॉप पे रहना हो तो जो बन्दा टॉप पे बैठा है उसको पटा।
लता की ताल पर सारा जहा नाच रहा है।
एक है सोनिया यानि सो।एक तू ही धनवान गोरी बाकी सब कंगाल।
विश्वामित्र के कान में मेनका ने कहा,मेनका का उल्टा कर दो कान में
क्या कहा कि नर्तकी कभी कीर्तन नही करने देती।नर्तकी का उल्टा कर दो कीर्तन और कीर्तन का उल्टा कर दो नर्तकी।
पंडित तरूण दुवे विदिशा