सोमवार, 22 अप्रैल 2019

ज्योतिष मे सटीक फलादेश

ज्योतिष मे सटीक फलादेश 


🌿ज्योतिष में सटीक फलादेश 🌿


ज्योतिष में मुख्य रूप से नवग्रह 27 नक्षत्र और कुंडली के 12 भाव के आधार पर ही लोग फलादेश करते हैं।

इन्ही क़ो पढ़ने समझने वाले क़ो ज्योतिषि कहते है।
         तौ कुंडली फलित मे इतना विरोधाभास क्यॊ जितने ज्योतिषी उतनी तरह की बाते क्यो कोई  कुछ बोलता है कोई कुछ जब ज्योतिष गणित है तो सबका एक क्यो नही । कारण हम बताते है जितने ज्योतिष क़ो जानने वाले है उनकी सबकी एक फलित होगा और जो ज्योतिष क़ो जानता नही केवल मनगढ़ंत बताएगा तो अंतर आएगा । कोई समस्या है तौ समाधान भी है ये बहुत बड़ी समस्या है इसका भी कोई  तौ हल होगा की अंतर क्यॊ हॊता है।
 ज्योतिषियों का ध्यान कारक पर प्रथम रहता है ।

गौर कीजिए 🌿

माने चौथे भाव का कारक चंद्र है बुरी तरह पीड़ित है राहु या केतु से सम्बन्ध है औऱ चौथे भाव का स्वामी उच्च का है या स्वराशि है औऱ मार्गी है शुभ ग्रह से द्रष्टि है तौ कारक क़ो देखकर कुण्डली फलित देखकर की चंद्र पीड़ित है औऱ केवल कारक से ही फलित निकाला की वाहन सुख नही मिलेगा प्रापर्टी नही बना पाएगा सुख नही मिलेगा तो सब गलत ही होगा क्योकि चौथा भाव का स्वामी कुण्डली मे अच्छी स्तिथि मे है तो पैतृक सम्पत्ति तो ख़ूब होगी ही औऱ बो उस सम्पत्ति क़ो औऱ बढ़ाएगा इसलिए कारक ग्रह से केवल फलित करने से  अंतर आता है औऱ भी एक कारण है की कुछ लोग केवल नक्षत्र क़ो ही देखकर फलित करते है बो सर्वथा ही गलत बो केवल स्वभाव औऱ गुण पर ही सटीक है बाकी सब गलत है इसलिए  पूरी तरह कुण्डली कें 12 भावों क़ो देखौ फिर भावों कें स्वामी  क़ो देखो फिर ग्रहों की द्रष्टि देखो फिर ग्रहों कें स्वभाव क़ो देखो क्योकि स्वभाव अगर नही देखा तो भी फलित नही कर पाओगे आप कहो कुछ होगा स्वभाव कें अनुसार कोयी भी ग्रह कें मित्र औऱ शत्रु देखो स्त्रूप ग्रह से अपेक्षा मत कीजिए जैसा कुण्डली मे है उसका वैसा फल देगा मित्र जगह 50% स्वराशि मे 75% उच्च होने पर 100% अब क्रूर द्रष्टि होने पर क्षमता कम हो जाती है अगर इस तरह कुण्डली फलित करोगे मित्रो तो आपका फलित 90% सटीक निकलेगा सभी अपनी अपनी कुण्डली चेक करे तो जैसे हमने बताया तो आपको अपने अनसुलझे सवाल खुद मिल जाएंगे।

अनुभव मैरा 🌿🌿
               यह मैंने अपने अनुभव के आधार पर एक छोटी सी बात रखी है  परंतु सटीक फलादेश एक बहुत ही बड़ी चीज है.. जो पूजन पाठ दया धर्म दान और कुलदेवता गुरु और इस्ट की कृपा से ही आती है.. 
पंडित तरूण दुवे विदिशा

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