रविवार के बाद सोमवार क्यों आता है शनिवार क्यों नहीं आइए जानते हैं ज्योतिष के अनुसार दिनों का क्रम
इस बात को सभी जानते हैं कि अहो रात्रि दिन रात को कहते हैं और दिन 7 होते हैं 15 दिन का एक पक्ष और एक माह में 2 पक्ष होते हैं एक कृष्ण पक्ष दूसरा शुक्ल पक्ष 12 मास 1 वर्ष में होता है परंतु यह जानने योग बात है कि बारो दिनों का क्रम रविवार के बाद सोमवार तथा सोमवार के बाद मंगलवार बुधवार आदि क्यों तात्पर्य यह की रविवार के बाद सोमवार ही क्यों हुआ दूसरा कोई वार क्यों नहीं हुआ आज हम इस पर विचार करते हैं सूर्य का उदय तथा बुद्धि और ज्ञान का विकास सबसे पहले भारत ही में हुआ था बहुत से लोगों को यह नहीं पता की क्रम से सप्त ग्रहों के नाम पर 7 दिनों क्यों माने गए
सबसे दूरस्थ ग्रह शनि है उसकी दूरी 88 करोड़ मील से कुछ ऊपर है शनि की एक परिक्रमा 1075 9 दिनों में अर्थात 30 वर्षों में होती है शनि से कम दूरस्थ बृहस्पति 48 करोड़ मील से कुछ और दूर है इस कारण यह एक परिक्रमा 43 32 दिनों में अर्थात 12 वर्ष में करता है बृहस्पति से कम दूरी मंगल की है इसकी दूरी 14 करोड़ मील से कुछ अधिक है इसलिए मंगल को एक परिक्रमा करने में 686 दिन लगते हैं मंगल से कम दूरी पृथ्वी की है यह लगभग 9 करोड़ मील पर है पर पृथ्वी को चलाएं मान नहीं मानकर सूर्य को चलायमान मानते हुए यही स्थान सूर्य को दिया गया इससे कम दूरी शुक्र है इसकी दूरी 6 करोड़ मील से अधिक है इस कारण शुक्र एक परिक्रमा 224 दिनों में करता है शुक्र से भी कम दूरस्थ बुद्ध वह साढे 3 करोड़ मील पर है इससे इसकी परिक्रमा 87 दिनों में होती है सबसे निकटस्थ चंद्रमा है यह है ढाई लाख मील से कम बा कुछ अधिक है अता चंद्रमा 27 दिन में अपनी परिक्रमा समाप्त करता है
यदि इन ग्रहों को उनके दूरवर्ती है क्रम में लिखे तो बे इस क्रम से पडेगे शनि बृहस्पति मंगल सूर्य शुक्र बुध चंद्रमा
अहो रात्रि 1 दिन रात को कहते हैं अहो शब्द के हो और रात्रि के रा मिलाने से सांकेतिक नाम होरा पड़ता है एक अहो रात्रि के 24 वां भाग को होरा कहते हैं एक रात दिन में 24 होरा होते हैं प्रलय के अंत में सूर्य का उदय होता है और उसी के प्रकाश में पृथ्वी और समस्त तारा गण मैं उज्जवल ता आती है इस कारण जब सूर्य का उदय हुआ तो ऋषि यों ने पहला होरा सूर्य को माना उसके बाद दूसरा होरा शुक्र का जो उससे समीपवर्ती ग्रह है उसके बाद बुध का क्योंकि शुक्र से बुद्ध निकट स्थ है इसी प्रकार चौथा होरा चंद्रमा का पांचवा होरा शनि का छटा होरा बृहस्पति का सातवां होरा मंगल का आठवां होरा सूर्य का नवा होरा शुक्र का दसवां होरा बुध का 11 वा होरा चंद्रमा का बारवा होरा शनि का तेरहवा होरा बृहस्पति का 14 होरा मंगल का 15 होरा सूर्य का सोलवा होरा शुक्र का 17 होरा बुध का 18 वा होरा चंद्रमा का 19 बा होरा शनि का 20 बा बृहस्पति का 21 वा मंगल का 22 बा सूर्य का 23 वा शुक्र का और 24 वा या अंतिम होरा बुद्ध का हुआ इसके बाद जब सूर्योदय हुआ तो प्रथम होरा चंद्रमा का हुआ इस कारण ऋषि यों ने रविवार के बाद सोमवार नाम रखा दिनों का क्रम इस प्रकार रखा गया है ।
इसमें कोई गलती हो गई हो तो क्षमा करना
इस बात को सभी जानते हैं कि अहो रात्रि दिन रात को कहते हैं और दिन 7 होते हैं 15 दिन का एक पक्ष और एक माह में 2 पक्ष होते हैं एक कृष्ण पक्ष दूसरा शुक्ल पक्ष 12 मास 1 वर्ष में होता है परंतु यह जानने योग बात है कि बारो दिनों का क्रम रविवार के बाद सोमवार तथा सोमवार के बाद मंगलवार बुधवार आदि क्यों तात्पर्य यह की रविवार के बाद सोमवार ही क्यों हुआ दूसरा कोई वार क्यों नहीं हुआ आज हम इस पर विचार करते हैं सूर्य का उदय तथा बुद्धि और ज्ञान का विकास सबसे पहले भारत ही में हुआ था बहुत से लोगों को यह नहीं पता की क्रम से सप्त ग्रहों के नाम पर 7 दिनों क्यों माने गए
सबसे दूरस्थ ग्रह शनि है उसकी दूरी 88 करोड़ मील से कुछ ऊपर है शनि की एक परिक्रमा 1075 9 दिनों में अर्थात 30 वर्षों में होती है शनि से कम दूरस्थ बृहस्पति 48 करोड़ मील से कुछ और दूर है इस कारण यह एक परिक्रमा 43 32 दिनों में अर्थात 12 वर्ष में करता है बृहस्पति से कम दूरी मंगल की है इसकी दूरी 14 करोड़ मील से कुछ अधिक है इसलिए मंगल को एक परिक्रमा करने में 686 दिन लगते हैं मंगल से कम दूरी पृथ्वी की है यह लगभग 9 करोड़ मील पर है पर पृथ्वी को चलाएं मान नहीं मानकर सूर्य को चलायमान मानते हुए यही स्थान सूर्य को दिया गया इससे कम दूरी शुक्र है इसकी दूरी 6 करोड़ मील से अधिक है इस कारण शुक्र एक परिक्रमा 224 दिनों में करता है शुक्र से भी कम दूरस्थ बुद्ध वह साढे 3 करोड़ मील पर है इससे इसकी परिक्रमा 87 दिनों में होती है सबसे निकटस्थ चंद्रमा है यह है ढाई लाख मील से कम बा कुछ अधिक है अता चंद्रमा 27 दिन में अपनी परिक्रमा समाप्त करता है
यदि इन ग्रहों को उनके दूरवर्ती है क्रम में लिखे तो बे इस क्रम से पडेगे शनि बृहस्पति मंगल सूर्य शुक्र बुध चंद्रमा
अहो रात्रि 1 दिन रात को कहते हैं अहो शब्द के हो और रात्रि के रा मिलाने से सांकेतिक नाम होरा पड़ता है एक अहो रात्रि के 24 वां भाग को होरा कहते हैं एक रात दिन में 24 होरा होते हैं प्रलय के अंत में सूर्य का उदय होता है और उसी के प्रकाश में पृथ्वी और समस्त तारा गण मैं उज्जवल ता आती है इस कारण जब सूर्य का उदय हुआ तो ऋषि यों ने पहला होरा सूर्य को माना उसके बाद दूसरा होरा शुक्र का जो उससे समीपवर्ती ग्रह है उसके बाद बुध का क्योंकि शुक्र से बुद्ध निकट स्थ है इसी प्रकार चौथा होरा चंद्रमा का पांचवा होरा शनि का छटा होरा बृहस्पति का सातवां होरा मंगल का आठवां होरा सूर्य का नवा होरा शुक्र का दसवां होरा बुध का 11 वा होरा चंद्रमा का बारवा होरा शनि का तेरहवा होरा बृहस्पति का 14 होरा मंगल का 15 होरा सूर्य का सोलवा होरा शुक्र का 17 होरा बुध का 18 वा होरा चंद्रमा का 19 बा होरा शनि का 20 बा बृहस्पति का 21 वा मंगल का 22 बा सूर्य का 23 वा शुक्र का और 24 वा या अंतिम होरा बुद्ध का हुआ इसके बाद जब सूर्योदय हुआ तो प्रथम होरा चंद्रमा का हुआ इस कारण ऋषि यों ने रविवार के बाद सोमवार नाम रखा दिनों का क्रम इस प्रकार रखा गया है ।
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