ज्योतिष के द्वारा जातक की विद्या का ज्ञान
प्राचीन समय में बालक इस अवस्था में विद्या अध्ययन के लिए गुरु आश्रम में भेज दिए जाते थे तत्पश्चात समावर्तन क्रिया के बाद विवाह आदि कर गृहस्था श्रम मैं प्रवेश करते थे परंतु दुख की बात है कि अब तो दुनिया ही पलट गई विद्या अध्ययन की कुछ शैली बची बचाई रह गई आइए जानते हैं ज्योतिष और विद्या के बारे में
चतुर्थ स्थान से विद्या का विचार किया जाता है, और पंचम से बुद्धि का विद्या और बुद्धि मैं घनिष्ठ संबंध है दशम से विद्या जनितयश का विचार किया जाता है!
परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने के लिए दशम स्थान से और बुद्धिमता इत्यादि का पंचम स्थान से होता है ! विद्या कई प्रकार की होती है जैसे साहित्य व्याकरण गणित कानून ज्योतिष आध्यात्मिक विद्या वेदांत काव्य आदि बृहस्पति से वेद वेदांत व्याकरण और ज्योतिष विद्या का विचार किया जाता है !
बुध से बेधक शुक्र से गायन विद्या प्रभावशाली व्याख्यान शक्ति एवं साहित्य और मंगल से न्याय एवं गणित विद्या का विचार किया जाता है!
इसी प्रकार सूर्य से वेदांत चंद्रमा से बेधक एवं राहु और शनि से अन्य देशीयविधा का विचार किया जाता है! जन्मपत्रिका में बुध तथा शुक्र की स्थिति से विद्वता तथा पांडित्य और कल्पना शक्ति का विचार किया जाता
है !
बृहस्पति से विद्या विकास का विचार किया जाता है द्वितीय भाव चतुर्थ भाव और नवम भाव से भी इन्हीं सब बातों का हनुमान लगाया जाता है क्योंकि द्वितीय भाव से विद्या में निपुणता प्रवीणता का विचार किया जाता है !
बुध ग्रह से विद्या अध्ययन और विद्या ग्रहण की शक्ति तथा नवम स्थान और चंद्रमा से काव्य कुशलता और धार्मिक विचार तथा आध्यात्मिक विद्या का विचार किया जाता है!
शनि नवम और द्वादश भाव से ज्ञान का विचार किया जाता है शनि से अंग्रेजी तथा विदेशी भाषाओं का भी विचार किया जाता है!
बृहस्पति से भी द्वितीय स्थान तृतीय स्थान चतुर्थ स्थान नवम स्थान को यदि बुध से संबंध होता है!
तो विद्या की उत्कृष्टता होती है चंद्र लग्न एवं जन्म लग्न से पंचम स्थान का स्वामी बुद्ध बृहस्पति शुक्र के साथ यदि केंद्र त्रिकोण एकादश भाव में बैठे हो तो मनुष्य बड़ा विद्वान होता है
प्राचीन समय में बालक इस अवस्था में विद्या अध्ययन के लिए गुरु आश्रम में भेज दिए जाते थे तत्पश्चात समावर्तन क्रिया के बाद विवाह आदि कर गृहस्था श्रम मैं प्रवेश करते थे परंतु दुख की बात है कि अब तो दुनिया ही पलट गई विद्या अध्ययन की कुछ शैली बची बचाई रह गई आइए जानते हैं ज्योतिष और विद्या के बारे में
चतुर्थ स्थान से विद्या का विचार किया जाता है, और पंचम से बुद्धि का विद्या और बुद्धि मैं घनिष्ठ संबंध है दशम से विद्या जनितयश का विचार किया जाता है!
परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने के लिए दशम स्थान से और बुद्धिमता इत्यादि का पंचम स्थान से होता है ! विद्या कई प्रकार की होती है जैसे साहित्य व्याकरण गणित कानून ज्योतिष आध्यात्मिक विद्या वेदांत काव्य आदि बृहस्पति से वेद वेदांत व्याकरण और ज्योतिष विद्या का विचार किया जाता है !
बुध से बेधक शुक्र से गायन विद्या प्रभावशाली व्याख्यान शक्ति एवं साहित्य और मंगल से न्याय एवं गणित विद्या का विचार किया जाता है!
इसी प्रकार सूर्य से वेदांत चंद्रमा से बेधक एवं राहु और शनि से अन्य देशीयविधा का विचार किया जाता है! जन्मपत्रिका में बुध तथा शुक्र की स्थिति से विद्वता तथा पांडित्य और कल्पना शक्ति का विचार किया जाता
है !
बृहस्पति से विद्या विकास का विचार किया जाता है द्वितीय भाव चतुर्थ भाव और नवम भाव से भी इन्हीं सब बातों का हनुमान लगाया जाता है क्योंकि द्वितीय भाव से विद्या में निपुणता प्रवीणता का विचार किया जाता है !
बुध ग्रह से विद्या अध्ययन और विद्या ग्रहण की शक्ति तथा नवम स्थान और चंद्रमा से काव्य कुशलता और धार्मिक विचार तथा आध्यात्मिक विद्या का विचार किया जाता है!
शनि नवम और द्वादश भाव से ज्ञान का विचार किया जाता है शनि से अंग्रेजी तथा विदेशी भाषाओं का भी विचार किया जाता है!
बृहस्पति से भी द्वितीय स्थान तृतीय स्थान चतुर्थ स्थान नवम स्थान को यदि बुध से संबंध होता है!
तो विद्या की उत्कृष्टता होती है चंद्र लग्न एवं जन्म लग्न से पंचम स्थान का स्वामी बुद्ध बृहस्पति शुक्र के साथ यदि केंद्र त्रिकोण एकादश भाव में बैठे हो तो मनुष्य बड़ा विद्वान होता है
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