, जरा सोचिये
आप कितने भी धनवान, शक्तिशाली और पढ़ें लिखे विद्वान हों लेकिन इससे कोई अन्तर नहीं पड़ने वाला है, आपके व्यक्तित्व का आकलन आपके धन, शक्ति और विद्वता से नहीं होगा।
आपके व्यक्तित्व का भान तो आपकी सोच, दूसरों के साथ आपके व्यवहार और आपके चरित्र इत्यादि से ही होगा।
अतः खूब धनवान, शक्तिशाली, शिक्षित और विद्वान होने पर भी हमें अपनी सोच सकारात्मक, चरित्र ऊँचा और दूसरों के साथ व्यवहार अच्छा ही रखना चाहिये।
*पंडित तरुण दुवे
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें