शुक्रवार, 5 जुलाई 2019

साक्षर

साक्षर

साक्षरा विपरीताश्चेद्राक्षसा एव केवलम् ।
सरसो विपरीताश्चेद् सरसत्वं न मुञ्चति ।।

भावार्थ - साक्षर (पढ़े लिखे)  लोग जब शब्द और स्वभाव से विपरीत हो जाते हैं तब राक्षस शब्द बनता है और व्यवहार भी ऐसा ही हो जाता है। परन्तु सरस (सज्जन) शब्दको विपरीत करोगे तो सरस (सज्जन) ही बनेगा और व्यवहार भी अच्छा ही रहेगा। अर्थात जो स्वभाव से सज्जन होता है, विषम परिस्थितियों में भी उसके स्वभाव में परिवर्तन नही आता, परन्तु जो स्वभाव से सज्जन न होकर केवल साक्षर होते हैं उनकी दुर्जनता प्रकट हो ही जाती है।

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