आज ज्योतिष में गुरु ग्रह से संबंधित विषयों पर चर्चा करते हैं ।
🏹#कारक #गुरु धर्म-कर्म देव ब्राह्मण पुत्र ग्रह बंधु पुत्र पितामह मित्र मंत्री कोष विद्या ज्योतिष उधर मतलब पेट कान श्रवण शक्ति ज्ञान अध्यापक परमार्थ तीर्थ सत्संग योग इन सबका कारक है।
#भावफल#-6/8/12 - निष्फल
1/9/5/2/10/11 -शुभ
राशि - 3/7/12- विद्वान और भी कई योग और फलादेश है संपूर्ण जानकारी कुंडली के द्वारा ही मिल सकती है।
🏹#रोग# गुरु ग्रह से आंतों का रोग हर्निया चक्कर आना देवस्थान संबंध से पीड़ा ब्राह्मणवाद देवता के कोप से रोग यक्ष किन्नर आदि द्वारा रोग गुरुजनों के अपराध से रोक देता है सुख पूर्वक मृत्यु प्रदान करता है कमर से जंगा तक कोई रोग हो सकता है पीपल वृक्ष कबूतर अंशु के पालन पोषण से प्रसन्न होता है यह आकाश तत्व का कारक है चर्मी कौर कफ की वृद्धि करता है।
गुरु ज्योतिष के नौ ग्रहों में सबसे अधिक शुभ फल देने वाला ग्रह है ।जिस किसी की कुंडली में गुरू शुभ होता है उसके पास सभी चीजें होती है ।जिसकी कुंडली में गुरु चंद्रमा सूर्य मंगल शुभ ग्रहों से दूरी या गलत भाव में होने पर बहुत अधिक कष्ट भी देता है गुरु ग्रह के बहुत ही साधारण उपाय हैं अपनी जन्म कुंडली के हिसाब से उपाय कर सकते है ।
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