कुंडली का विश्लेषण कैसे होता है
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जीवन से जुड़े बहुत सारे विषयो कोई न कोई पोस्ट होती रहती है लेकिन पूरी तरह से कुंडली का विश्लेषण कैसे होता है?, क्या घटना कब कैसे होती है? आदि इसकी जानकारी तो सिर्फ कुंडली के अध्ययन से ही निकाली जाती है।यह नीचे दी गई कुंडली एक 30साल के जातक की है।इसकी कुंडली काफी दमदार भी है जिस वजह से यह जातक आज एक सफल व्यक्ति है लेकिन सफल होने के लिए इसने कुछ सुखो का त्याग भी किया उसी वजह से यह आज सफल है।।
मीन लग्न की कुंडली है साथ ही लग्नेश गुरु अपनी उच्च राशि में जाकर 5वें भाव में बैठकर लग्न को देख रहा है।लग्नेश गुरु का त्रिकोण 5वें भाव में उच्च होकर लग्न को देखना अपने आप में ही एक राजयोग और आकर्षक व्यक्तित्व दे रहा है।लग्नेश गुरु की 5वीं और 7वीं दृष्टि नवे और ग्यारहवे भाव पर शुभ फलो में वृद्धि कर रही है।।सबसे पहले बात करते है शिक्षा की:
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शिक्षा का स्तर पंचम भाव--
पंचमेश और गुरु बुध यह शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण ग्रह है इस जातक ने एम. ए. कर रखा है जो ही एक सामान्य वर्ग की उच्च शिक्षा है कोई तकनिकी शिक्षा नही।यहाँ पंचमेश चन्द्र सप्तम भाव में बैठकर अस्त हो जाने साथ ही पंचमेश पर दशम भाव से शनि और ग्यारहवे भाव से राहु की दृष्टि होने से शिक्षा पूरी होने या शिक्षा ग्रहण करने में बाधा दिखा रही है जो कि बाधा आई जब इस जातक की शिक्षा का समय था तब इसके पिता की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नही थी जिस कारण पैसे के कारण दिक्कत आई क्योंकि धन के मालिक मंगल पर राहु की दृष्टि भी है और राहु की दृष्टि पंचम भाव पर भी है इसी कारण पैसे के कारण शिक्षा में दिक्कते आई लेकिन पंचम भाव में लग्नेश गुरु के उच्च होकर बैठने से साथ ही बुध के वर्गोत्तम(लग्न और नवमंश् कुंडली में एक ही राशि) में होने से शिक्षा पूरी हुई।किसी रिश्तेदार ने आर्थिक रूप से मदद की।।
कैरियर-
कैरियर की स्थिति देखे तो इस कुंडली में बहुत बढ़िया है दशम भाव कैरियर को दर्शाता है।यहाँ दशमेश गुरु खुद उच्च का होकर त्रिकोण पंचम स्थान में है जिसके साथ केतु की युति और लाभ स्थान में राहु से दृष्टि सम्बन्ध है केतु का हमेशा काम होता है कि वह जिस भी ग्रह के साथ बैठता है उस ग्रह को अपनी पूरी शक्ति दे देता है और उच्च ग्रह के साथ बैठने पर उसकी ताकत को 3गुना बढ़ा देता है जो की गुरु की केतु ने बढ़ाई साथ ही ग्यारहवे लाभ स्थान में बेठे राहु ने गुरु(कैरियर) को उन्नति दी जिस कारण यह जातक एक govt.contractor है क्योंकि दशम स्थान में शनि भी है साथ ही भाग्येश मंगल वर्गोत्तम होकर भाग्य स्थान को देख रहा साथ ही भाग्य स्थान पर उच्च के पग्नेश दशमेश गुरु की दृष्टि भी है जिस कारण भाग्य इस जातक का काफी बलवान है भाग्य के बलवान होने से जातक बहुत भाग्यशाली होता है जो कि यह जातक है इसका भाग्य हमेशा इसका साथ बहुत सारे मामलो में देता है।।
वैवाहिक जीवन-
वैवाहिक जीवन के लिए जरूरी होता है कुंडली का सप्तम भाव और शुक्र यहाँ सप्तम भाव में चन्द्र अस्त होकर छठे भाव के स्वामी सूर्य के साथ अमावस्या योग बनाकर बैठा है+सप्तम भाव पर शनि और राहु की दृष्टि होने से सप्तम भाव और चंद्र सूर्य पीड़ित भी है साथ ही सप्तमेश बुध छठे भाव में है यह सब स्थितियां वैवाहिक जीवन के लिए अच्छी नही है।इसजातक का वैवाहिक जीवन अच्छा नही रहेगा 6और 7वे भाव के स्वामियों के बीच बुध सूर्य के बिच राशि परिवर्तन होने +सप्तम भाव राहु शनि दृष्टि से पीड़ित होने से साथ ही सप्तमेश बुध पर मंगल की चौथी दृष्टि होने से पत्नी बीमार रहेगी और वैवाहिक जीवन का सुख भी ज्यादा अच्छा नही रहने वाला क्योंकि वैवाहिक जीवन संबंधी सभी स्थितियां इस कुंडली में ख़राब है।नवमांश कुंडली भी वैवाहिक जीवन के लिए सही नही है तो विवाह सुख कम है।।
मकान और प्रॉपर्टी-
मकान और प्रॉपर्टी का विचार कुंडली के चोथे भाव, चोथे भाव के स्वामी और मंगल से किया जाता है अब देखे तो चोथे भाव का स्वामी बुध छठे भाव में जाने से मकान सुख के लिए शुभ नही है साथ ही मकान, प्रॉपर्टी के भाव चोथे पर शनि की दृष्टि+चौथा भाव केतु और मंगल के बीच होने से पाप कर्तरी योग में अशुभ और पीड़ित हो गया तो भाव और भाव का स्वामी दोनों ख़राब स्थिति में है इन स्थितियों के कारण अपने मकान के सुख में बाधा और दिक्कते रहेगी या मकान या प्रॉपर्टी बनाई तो उसकी तरफ से नुकसान में जाना पड़ेगा जो कि यह जातक जा चूका है इस जातक ने बहुत अच्छा फ्लेट खरीदा लेकिन जहा फ्लेट लिया वहाँ के आस-पास के फ्लेट खाली है और दूर दूर तक कोई नही क्योंकि चोथे भाव पर एकाकी शनि की दृष्टि और चोथे भाव का पाप कर्तरी योग में होना+चतुर्थेश का छठे भाव में जाना मकान के सम्बन्ध में हानि और गलत निर्णय दिला रहा है।चतुर्थेश बुध के छठे भाव में होने से किराये के मकान पर लम्बे समय तक रहना होगा क्योंकि छठा भाव किराये का है।कही लम्बे समय में जाकर अपने मकान का सुख मिलेगा।।
#चौथा भाव और सूर्य चन्द्र(पिता-माता कारक सूर्य चन्द्र) शनि राहु दृष्टि सेपीड़ित होने से माता-पिता से यह हमेशा दूर रहेगा जो यह रहा उनका सुख नही मिलेगा जो ही नही मिला।।
राजयोग-
देखे तो इस कुंडली में कोई वास्तविक राजयोग नही बन रहा जैसे की केंद्र त्रिकोण का सम्बन्ध या कोई खास ग्रहो की युति।लेकिन इस कुंडली में ग्रहो की placement और ग्रहो की स्थिति बढ़िया है जिस कारण professionalay यह जातक सफल है जैसे कि दशमेश गुरु का उच्च होकर त्रिकोण में बैठना बेहतर स्थिति+ भाग्येश मंगल का वर्गोत्तम होकर भाग्य स्थान को देखना( मंगल के अपने ही भाव भाग्य को देखने से भाग्य का साथ समय समय पर मिला जो की जीवन में सफल और आगे बढ़ने के लिए बहुत जरूरी है) लग्नेश का लग्न को देखना, बुध और मंगल दो ग्रहो का वर्गोत्तम होना, बुध शुक्र युति से लक्ष्मी नारायण योग बनना, अष्टमेश शुक्र का छठे भाव में जाकर विपरीत राज्योव बनाना, धनेश मंगल का वर्गोत्तम होकर बलवान होना, और आय लाभ के भाव में राहु का शुभ होकर बेठना इन सभी ग्रहो की placement अच्छी होने से इस जातक की professionally स्थिति बढ़िया है साथ ही वर्तमान में राहु की महादशा भी चल रही है जो कि राहु दशमेश गुरु से दृष्टि सम्बन्ध बनाकर कार्य छेत्र में सफल बना रहा है क्योंकि व्यापार का कारक बुध होता है और इस जातक का बुध वर्गोत्तम+सूर्य के साथ राशि परिवर्तन करने से अत्यंत बलशाली है साथ ही 2, 9, 10, 11 भाव भी बलवान है जो कि व्यापार में सफल बना देने में समर्थ है।ऊपर बताया है मैंने यह जातक govt.contractor है।दशाओ के आधार पर देखे तो अभी राहु की महादशा, राहु के बाद गुरु की, गुरु के बाद शनि की जो की profession house में ही है शनि के बाद वर्गोत्तमी बुध की महादशा फिर केतु महादशा जो की दधमेश गुरु से युति में है इस कारण professionalay तो यह सफल रहेगा और जातक उन्नति करता रहेगा।लेकिन वैवाहिक सुख, प्रॉपर्टी- मकान सुख में समस्या और कमी रहेगी। बाकि तो बहुत ओर बाकि है इस कुंडली में लेकिन जो महत्वपूर्ण बिन्दु जीवन के होते है उसका विचार इस कुंडली पर किया गया
Pandit Tarun dubey
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