गायत्री मंत्र का अर्थ
*ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।*
*यह मंत्र सूर्य देवता (सवितुर) के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता है ।।*
*हे प्रभू! आप हमारे जीवन के दाता हैं आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले हैं आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले हैं ।।*
*हे संसार के विधाता हमें शक्ति दो कि हम आपकी ऊर्जा से शक्ति प्राप्त कर सकें ।।*
*कृपा करके हमारी बुद्धि को सही रास्ता दिखायें ।।*
*मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या गायत्री मंत्र के पहले नौं शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं ।।*
*ॐ = प्रणव*
*भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाले*
*भुवः = दुख़ों का नाश करने वाले*
*स्वः = सुख़ प्रदान करने वाले*
*तत = वह,*
*सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल*
*वरेण्यं = सबसे उत्तम*
*भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाले*
*देवस्य = प्रभू*
*धीमहि = आत्म चिंतन के* *योग्य (ध्यान)*
*धियो = बुद्धि,*
*यो = जो,*
*नः = हमारी,*
*प्रचोदयात् = हमें शक्ति दे*
*ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।*
*यह मंत्र सूर्य देवता (सवितुर) के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता है ।।*
*हे प्रभू! आप हमारे जीवन के दाता हैं आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले हैं आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले हैं ।।*
*हे संसार के विधाता हमें शक्ति दो कि हम आपकी ऊर्जा से शक्ति प्राप्त कर सकें ।।*
*कृपा करके हमारी बुद्धि को सही रास्ता दिखायें ।।*
*मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या गायत्री मंत्र के पहले नौं शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं ।।*
*ॐ = प्रणव*
*भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाले*
*भुवः = दुख़ों का नाश करने वाले*
*स्वः = सुख़ प्रदान करने वाले*
*तत = वह,*
*सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल*
*वरेण्यं = सबसे उत्तम*
*भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाले*
*देवस्य = प्रभू*
*धीमहि = आत्म चिंतन के* *योग्य (ध्यान)*
*धियो = बुद्धि,*
*यो = जो,*
*नः = हमारी,*
*प्रचोदयात् = हमें शक्ति दे*
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