रविवार, 30 जून 2019

गायत्री मंत्र का अर्थ भाग 1

           गायत्री मंत्र का अर्थ

*ॐ भूर्भुवः स्वःतत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ।।*

*यह मंत्र सूर्य देवता (सवितुर) के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता है ।।*

*हे प्रभू! आप हमारे जीवन के दाता  हैं  आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले हैं आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले हैं ।।*

*हे संसार के विधाता हमें शक्ति दो कि हम आपकी ऊर्जा से शक्ति प्राप्त कर सकें ।।*

*कृपा करके हमारी बुद्धि को सही रास्ता दिखायें ।।*

*मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या गायत्री मंत्र के पहले नौं शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं ।।*

*ॐ = प्रणव*

*भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाले*

*भुवः = दुख़ों का नाश करने वाले*

*स्वः = सुख़ प्रदान करने वाले*

*तत = वह,*

*सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल*

*वरेण्यं = सबसे उत्तम*

*भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाले*

*देवस्य = प्रभू*

*धीमहि = आत्म चिंतन के* *योग्य (ध्यान)*

*धियो = बुद्धि,*

*यो = जो,*

*नः = हमारी,*

*प्रचोदयात् = हमें शक्ति दे*

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