शुक्रवार, 28 जून 2019

ॐ का उच्चारण क्यों और कब जरूरी है


*ॐ , ओउम् तीन अक्षरों से बना है।*

 *अ उ म् ।*

*"अ" का अर्थ है उत्पन्न होना,*


 *"उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास,*


*"म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना।*


*ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है।*


*ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है।*


*जानिए*


*ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक*

*और*

 *अपनाएं आरोग्य के लिए ॐ के उच्चारण का मार्ग...*


*1. ॐ और थायराॅयडः-*

 *ॐ का उच्‍चारण करने से गले में कंपन पैदा होती है जो थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।*


*2. ॐ और घबराहटः-*

 *अगर आपको घबराहट या अधीरता होती है तो ॐ के उच्चारण से उत्तम कुछ भी नहीं।*


*3. ॐ और तनावः-*

 *यह शरीर के विषैले तत्त्वों को दूर करता है, अर्थात तनाव के कारण पैदा होने वाले द्रव्यों पर नियंत्रण करता है।*


*4. ॐ और खून का प्रवाहः-*

 *यह हृदय और ख़ून के प्रवाह को संतुलित रखता है।*


*5. ॐ और पाचनः-*

 *ॐ के उच्चारण से पाचन शक्ति तेज़ होती है।*


*6. ॐ लाए स्फूर्तिः-*

 *इससे शरीर में फिर से युवावस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है।*


*7. ॐ और थकान:-*

 *थकान से बचाने के लिए इससे उत्तम उपाय कुछ और नहीं।*


*8. ॐ और नींदः-*

 *नींद न आने की समस्या इससे कुछ ही समय में दूर हो जाती है। रात को सोते समय नींद आने तक मन में इसको करने से निश्चिंत नींद आएगी।*


*9. ॐ और फेफड़े:-*

 *कुछ विशेष प्राणायाम के साथ इसे करने से फेफड़ों में मज़बूती आती है।*


*10. ॐ और रीढ़ की हड्डी:-*

 *ॐ के पहले शब्‍द का उच्‍चारण करने से कंपन पैदा होती है। इन कंपन से रीढ़ की हड्डी प्रभावित होती है और इसकी क्षमता बढ़ जाती है।*


*11. ॐ दूर करे तनावः-*

 *ॐ का उच्चारण करने से पूरा शरीर तनाव-रहित हो जाता है।*


*आशा है आप अब कुछ समय जरुर ॐ का उच्चारण  करेंगे।*

*"पहला सुख निरोगी काया"*

*जय श्रीराम
पंडित तरूण दुवे विदिशा 

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